हाँ, मैं शराब पीकर आया हूँ,
वो शाम आख़िरी दफ़ा जीकर आया हूँ।
आज मिट्टी में दफ़्न कर यादें तेरी,
तसव्वुरों का मक़बरा बनाकर आया हूँ।
पलटकर देखना न सूरत मेरी,
मैं आज अपनी सीरत बदलकर आया हूँ।
और न पूछना मुझसे मेरा हाल क्या है,
मैं खुली आँखों से ज़हर पीकर आया हूँ।