क्या रोकेंगे ज़मीं पर रहने वाले मुझे

फ़ज़ा में चूमती उड़ान हूँ मैं 

जब खोलूँ अपनी तीसरी आँख

तो प्रचंड तूफ़ान हूँ मैं

ज़ालिम होकर दुनिया पूजती पत्थरों को

नास्तिक सही, मगर अच्छा इंसान हूँ मैं

मेरी चौखट पर आना, जब तन्हा लगे तुमको

मैं रफ़ीक़, पीड़ाओं का कान हूँ मैं

लाख कोशिशें कर बंदिशें लगाने की, ए जाबिर 

मैं आज़ाद मुल्क, हिंदुस्तान हूँ मैं

किस शोहरत से तोलोगे मेरे अक्स को 

सुयश हूँ, सुयश का प्रतिमान हूँ मैं